
भारत सरकार की संस्था BIS (Bureau of Indian Standards) ने 2025 में नया Seismic Zonation Map जारी किया है, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी है। वजह?
इस नए मैप के अनुसार भारत की 75% आबादी अब High-Risk Zone VI में रहती है—और हिमालयन रेंज पिछले 200 साल से हिली ही नहीं, यानी किसी भी समय एक बड़ा भूकंप आ सकता है।
आखिर नया Earthquake Risk Map है क्या?
BIS ने ये मैप ‘IS 1893 (Part 1): 2025’ कोड के तहत रिलीज किया है।
इसका काम है— देश को भूकंप खतरे के हिसाब से बांटना। नई बिल्डिंग्स, ब्रिज, हाईवे को भूकंपीय नुकसान से बचाना। इंजीनियरिंग डिज़ाइन को ज्यादा सुरक्षित बनाना।
पुराना मैप 2002 का था (2016 में मामूली अपडेट), लेकिन अब इसे modern seismic science से तैयार किया गया है।
नया मैप पुराने से कितना अलग है?
पहले भारत 4 जोन्स में बांटा था—
- Zone II (Low Risk)
- Zone III (Medium Risk)
- Zone IV (High Risk)
- Zone V (Very High Risk)
अब Zone V को और ज्यादा खतरनाक बताते हुए इसे Ultra High Risk — यानी Zone VI जैसा माना गया है। पहले 59% India High Risk में था। अब 61% इलाका Zone III–VI में आ गया है।
सबसे बड़ा बदलाव—रीजन को पुरानी हिस्ट्री नहीं, बल्कि Probabilistic Seismic Hazard Assessment (PSHA) से scientifically मैप किया गया है।
हिमालय में सबसे बड़ा बदलाव — सब एक साथ Zone VI में!
पहले हिमालय का कुछ हिस्सा Zone IV, कुछ Zone V में था। अब- Kashmir से Arunachal तक पूरा Himalayan Arc अल्ट्रा-हाई-रिस्क Zone VI में डाल दिया गया है।
क्यों?
क्योंकि Himalayan Lock Segments पिछले 200 साल से हिले ही नहीं, यानी प्लेट्स में बहुत ज्यादा ऊर्जा जमा है।
देहरादून, हरिद्वार जैसे तराई क्षेत्र भी अब ज्यादा sensitive घोषित हुए हैं।
हिमालय में इतना बड़ा जोखिम क्यों?
नई रिसर्च कहती है—
- Indian Plate तेज़ी से Eurasian Plate से टकरा रही है
- कई जगह प्लेट्स लॉक हैं
- लॉक मतलब—Energy जमा हो रही है, निकल नहीं रही
- इससे 8+ मैग्नीट्यूड का मेगा-क्वेक संभव है
NCS और NDMA की रिपोर्ट्स भी चेतावनी देती हैं कि अगला बड़ा भूकंप हिमालय में कहीं भी आ सकता है।
क्या South India सुरक्षित है?
South India अपेक्षाकृत stable है क्योंकि Peninsular India पुरानी व मजबूत चट्टानों से बना है।

यहां बदलाव कम हैं:
Majority ज़ोन II–III
Moderate risk
Coastal मिट्टी में liquefaction का खतरा देखा गया है
लेकिन Himalayan Zone VI जैसा खतरा नहीं है।
नया Earthquake Map कितना भरोसेमंद?
यह अब तक का सबसे advanced seismic map है।
10 साल की रिसर्च +
GPS Data
Satellite Imagery
Active Fault Lines
लाखों simulations
यही तरीका Japan और New Zealand जैसे देशों में भी लागू है।
क्या नया मैप हमें Earthquake-proof कर देगा?
100% सुरक्षित? नहीं।
लेकिन—
Deaths 80–90% तक कम हो सकती हैं
Buildings भूकंप में हिलेंगी लेकिन गिरेंगी नहीं
पुराने constructions को upgrade करने से बड़ा नुकसान टल सकता है
भारत के इतिहास के 3 सबसे बड़े Earthquakes
(1) 2004 Tsunami Megaquake
इंडोनेशिया में आए 9.1 भूकंप का असर भारत तक—
• Indira Point डूबा
• 14 देशों में तबाही
• 1.7 लाख मौतें
(2) 2001 Gujarat Bhuj Earthquake (6.9)
• 17,000 मौतें
• कच्छ में 90% घरों को नुकसान
• 7,904 गांव तबाह
(3) 1819 Allah Bund Quake (Est. 7.8+)
• भुज में भूकंप से पूरा टापू उभर आया
• इसे Allah Bund कहा गया
नया मैप चेतावनी है — तैयारी का वक्त है
भारत के लिए नया Earthquake Map एक तरह से अलार्म है। हिमालय का पूरा इलाका High-Alert Zone VI में है और देश की 75% आबादी सीधे खतरे में। आज अगर हम अपनी building standards मजबूत कर लें— तो कल की तबाही टाल सकते हैं।
